जनसंपर्क विभाग के कैडर को पलीता आयात हो रहे हैं अफस
जनसंपर्क कमिश्नर के फ़ैसलों से गिर रही सरकार की साख
मध्यप्रदेश सरकार की छवि बनाने वाले विभाग की कार्यशैली पर ही उठ रहे हैं सबाल विभाग के अंदर मचा है बबाल कारण जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को दरकिनार करते हुए बाहर से पदस्थ किए जा रहे एसएएस अधिकारी के कारण जनसंपर्क के सीनियर अफ़सरों में बेहद आक्रोश है । दरअसल मामला एक आदेश से जुड़ा हुआ है जिसमें नर्मदापुरम में पदस्थ उपायुक्त राजस्व गणेश प्रसाद जायसवाल को अपर संचालक जनसंपर्क संचालनालय में पदस्थ कर दिया है ।जनसंपर्क के आयुक्त के इस प्रकार के फ़ैसले सरकार पर भारी पड़ रहे हैं क्योंकि जनसंपर्क विभाग के केडर को बायपास कर राजस्व और अन्य विभागों से अधिकारी आयातित किए जा रहे हैं । इसका मूल कारण विज्ञापन है जिसमें आरोप लगते रहे हैं कि जो छोटे या मंझोले अख़बार पत्र पत्रिकाएँ हैं उनसे बिना सुबिधा शुल्क के विज्ञापन जारी नहीं किए जाते वहीं दूसरी ओर सरकार की योजनाओं का प्रचार प्रसार भी नेगेटिव होता है । ऐसा लगता है कि जनसंपर्क विभाग को डिप्टी कलेक्टर, पटवारी और तहसीलदार चलाएँगे जैसे और विभागों में डेप्यूटेशन चल रहा है । ऐसा ग्वालियर की नगर पालिका निगम में हो चुका है जहां पशुपालन विभाग के डॉक्टर स्वास्थ्य अधिकारी बनाए गए थे और डिप्टी कमिश्नर भी वही राग अब मध्यप्रदेश के सबसे मुखर विभाग में किया जा रहा है जहां आयातित अधिकारी जनसंपर्क को चलाएँगे और वहां के अधिकारियों को साइड लाइन किया जाए

